18 मार्च, 2007

प्रभु हैं तो प्रेत भी होंगे

दुनिया के सभी धर्मों के एक बात समान है--आत्मा है और परमात्मा है. बाक़ी सब डिटेल है... स्वर्ग-नरक भी लगभग हर धर्म में है.. हाँ, जन्म-पुनर्जन्म को लेकर मतभेद है. दुनिया में कोई ऐसा समाज नहीं है चाहे वह कितना भी विकसित हो या पिछड़ा, जहाँ भूत-प्रेत न हों. यह बहुत स्वाभाविक भी है. अगर आत्मा है, परमात्मा है तो प्रेतात्मा की संभावना को नकारना बहुत मुश्किल काम है. प्रेत भी तर्क के उतने ही परे हैं जितना कि ईश्वर, प्रेत भी इंसान के अनुभव संसार का हिस्सा उतना ही हैं (या ज्यादा ही) जितना कि ईश्वर.

यह कह देने से काम नहीं चलेगा कि ईश्वर आस्था का प्रश्न है और भूत-प्रेत अंधविश्वास. यह वैसी ही बात है कि आप कहें कि स्वास्थ्य सच है और रोग झूठ, अगर मानव शरीर है तो दोनों होंगे. अगर मानव शरीर नहीं है तो दोनों नहीं हैं.

आस्तिकों की एक बड़ी बिरादरी है जो कहती है ईश्वर तो है लेकिन भूत नहीं होते. भूत़-प्रेत की एक शाश्वत परिभाषा है कि वे शरीर छोड़ चुकी भटकती हुई आत्माएँ हैं. ऐसी आत्माएँ जिनका केस पेंडिग है, जिनकी इच्छाएँ अतृप्त हैं या जो किसी कारण से न तो स्वर्ग जा सकती हैं न ही नरक और उनका पुनर्जन्म भी नहीं हो सकता. मौजूदा दौर में पाँच अरब की आबादी वाली दुनिया में इतनी ही आत्माएँ हैं (इससे मैं पूरी तरह सहमत नहीं, पिछले पोस्ट्स देखें) तो यह बहुत संभव है कि उनमें से कुछ लाख ऐसी होंगी जिनका केस पेंडिंग होगा. ईश्वर की व्यवस्था कितनी भी अच्छी हो उसमें अनेक खामियों की बात हम सब जानते हैं, आस्तिकों को भी मानना पड़ता है कि 'प्रभु की माया है'. ऐसे में अगर सिस्टम एरर का रेट 0.5 प्रतिशत हो तो सोच लीजिए कितने भूत होंगे जिनको ईश्वर की व्यवस्था में कुछ समय के लिए जगह नहीं मिल पाएगी...ढाई करोड़ भूत तो इसी तरह होंगे. बाक़ी भूत़-प्रेत बनने के जितने आधार हैं उनके बारे में भी सोचिए. ख़ैर, मज़ाक रहने दीजिए.

ज़रा ग़ौर से सोचिए...ईसाई तो गॉड, हिज़ सन (यीशु) एंड 'होली घोस्ट' की बात बाईबल में करते हैं. आस्तिकों और नास्तिकों अंतिम वाक्य में एक बार फिर स्पष्ट कर दूँ कि मैंने अपनी तरफ़ से सिर्फ़ एक सवाल रखा है, आत्मा-परमात्मा को मानना और प्रेतात्मा को न मानना कितना वस्तुपरक है? मैं तो भ्रमित हूँ.

प्रतिक्रिया दें.

8 टिप्‍पणियां:

Neeraj Rohilla ने कहा…

"यह कह देने से काम नहीं चलेगा कि ईश्वर आस्था का प्रश्न है और भूत-प्रेत अंधविश्वास"

आपकी पोस्ट में इस पंक्ति ने सर्वाधिक प्रभावित किया ।

भूत-प्रेत अंधविश्वास नहीं हैं, अंधविश्वास है ये मान्यता कि कुछ मानसिक और शारीरिक रोग भूत-प्रेत और आत्माओं के शरीर में प्रवेश करने से होते हैं ।

ईश्वर के अस्तित्व को सिद्ध करना दुष्कर कार्य है परन्तु शारीरिक/मानसिक बीमारियां जो औषधी से ठीक हो सकती हैं, उनके लिये भूत-प्रेत झाडने जैसे ओझाओं की क्या आवश्यकता?

Pramod Singh ने कहा…

आपके भ्रम बडे नशीले हैं...

शैलेश भारतवासी ने कहा…

अनामदास जी,

कल मैं सृजन शिल्पी जी से मिला तब आप की असलियत का पता चला। वैसे आपके पोस्ट पर पहले भी नज़र थी, मगर टिप्पणी आज पहली बार कर रहा हूँ।

अंग्रेज़ी शब्द का बेहतर इस्तेमाल यहाँ देखा मैंने- ऐसी आत्माएँ जिनका केस पेंडिग है

वैसे ऋगवेद की संकल्पनाओं को मानें तो प्रेतात्मा की बात उसमें मिलती ही नहीं। हाँ ऊर्जा के सिद्धान्तानुसार शायद यह ट्रांज़िशन फ़ेस हो। मगर थर्मोडायनामिक्स का शून्यवा नियम इसकी व्याख्या नहीं करता। बाकी ज्ञानीजन जानें।

सृजन शिल्पी ने कहा…

आपका मन इन विषयों पर भी इतनी संजीदगी से सोचता है, यह बड़ा दिलचस्प लगा। मैं तो आपके इस पहलू से वाकिफ़ ही नहीं था।

मैंने तो भूत-प्रेत नहीं देखा कभी, लेकिन वे होते हैं, यह बात ऐसे ज्ञानियों ने भी कही हैं, जिनपर मैं अविश्वास नहीं कर सकता। जैसे कि स्वामी विवेकानन्द और पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य। सूक्ष्म लोक और सिद्धियों के बारे में उनका ज्ञान उतना ही प्रत्यक्ष था, जितना हमारे इस लोक के बारे में।

yogesh samdarshi ने कहा…

आप जैसा ही कुछ भ्रम मेरा भी है. मान्यताऔं की बात है यह मैं मानता था पर आत्मा की बात कुछ हद तक प्रत्यक्ष देखी है. राजस्थान मे एक हिंन्दु मान्यता की जगह है. वहां मैं गया हू. वहा के बारे मे लोगों का कहना है कि वहां नास्तिक आस्तिक बन जाते है. वहा वास्तव में मैंने अपनी आंखो से देखा है कानों से सुना है, एक अच्छी भली पढी लिखी सुसभ्य महिला अचानक भद्`दी गालियां देने लगती है. वह अपने को मर्द बताने लगती है, उसके साथ आए लोगों से वह वो बनकर बात करती है जो इस दुनिया में अब नहीं रहा. वैसे तो हमारे यहां का फैशन हो गया है कि डिग्री हाथ मे लेकर कोई चाहे जो कह दे विज्ञान के नाम पर हम मानलेते है पर आस्था के प्रमाण मांगते है पर फिर भी मैं यह जरूर कहना चाहूंगा कि बया जा कर एक बार वह लोग अवश्य देखे जो आत्मा की बात नहीं मानते.

अभय तिवारी ने कहा…

आपके भ्रम दूर करने के लिये मेरा सुझाव- गरुड़ पुराण का प्रेत कल्प और the tibetan book of the dead..

बेनामी ने कहा…

anam das zee apne jis satikta ke sath teer choda hai vo sahi jagah par laga hai koi bhi gyani apki kala pe akrashit ho jayega . bhoot aur bhagvaan ka na to pramad diya ja sakta hai na hi jhutlaya ja sakta hai. jab tak hum bhouteek roop s shamppna na ho jaye .alabatta bahas to lambi chlegi. vimal.singh.vs@gmail.com

Yogesh ने कहा…

कोरी बकवास,
न ही भूत प्रेत होते हैं और न ही मैं भगवान में यकीन रखता हूँ

ये भूत प्रेत और भगवान का जन्म दाता इन्सान का अन्दर का डर ही है। सब ये क्यों कहते हैं भगवान से डर के रहो? भगवान अगर है, तो वो ये क्यों चाहेंगें के सब उनकी पूजा करें?

किसी ने आज तक भूत को देखा नहीं, सब सुनी सुनाई बातों को हवा देने में लगे रहते हैं

इसी कारण से बाबाओं की दुकानें फलती फूलती रहती हैं