12 अप्रैल, 2007

अनामदास की मूविंग इमेज

पुरानी डायरी से ज़्यादा रूमानी शायद ही कोई और चीज़ होती है, उसे पलटते हुए एक अजीब-सा रोमांच होता है. डायरी के पन्ने उन पगडंडियों की तरह होते हैं जिनसे हम गुज़रे हैं, डायरी के पन्ने हमेशा MPEG फॉर्मेट में होते हैं, मूविंग इमेज अक्सर बहुत मूविंग होते हैं.हीरो साइकिल की एक पुरानी डायरी है, पन्ने ज़र्द हो चुके हैं, हर पन्ने पर एक सूक्ति छपी है. 14-16 दिसंबर 1989 के पन्ने पर अठारह वर्ष के नवअंकुरित कवि ने कुछ लिखा है जिसकी कविताई सिर्फ़ दो-तीन बरस में मुरझा गई. नारद जी ख़ासे साहित्य प्रेमी हैं, तक़रीबन आधे पोस्ट कविता-कहानी के हैं जिससे हौसला बहुत बढ़ा है. 36 वर्ष के अनामदास को 18 वर्ष के एक कवि को इंट्रोड्यूस करने की अनुमति दीजिए.

बुढ़ा रहे अनामदास ने जवान हो रहे कवि की रचना में अपनी तरफ़ से कोई संशोधन नहीं किया है.

एक

अभी नहीं लिख सकता
कभी नहीं लिख सकता

वही नहीं लिख सकता
सही नहीं लिख सकता

उसकी नहीं लिख सकता
अपनी नहीं लिख सकता

कथनी नहीं लिख सकता
करनी नहीं लिख सकता

यहीं नहीं लिख सकता
कहीं नहीं लिख सकता

यूँ नहीं लिख सकता
क्यों नहीं लिख सकता

दो

करोड़ों सफ़ों में लिखा है
अरबों हर्फ़ों में लिखा है

सैकड़ों ज़बानों में लिखा है
वेद पुराणों में लिखा है

सब तो पहले से लिखा है
सदियों-सदियों से लिखा है

किताबों में सच लिखा है
उनमें झूठ भी लिखा है

सब ज्ञान-विज्ञान लिखा है
अंधकार-अज्ञान लिखा है

तीन

लोग फिर भी लिख रहे हैं
शब्द फिर भी बिक रहे है

जज सज़ा लिख रहे हैं
मुजरिम ख़ता लिख रहे हैं

सब अपना लिख रहे हैं
हम सपना लिख रहे हैं

बार-बार वही अक्षर उग रहे हैं
लफ़्ज़ों के ज़ख्म दुख रहे हैं

दुख सुख रंजोग़म लिख रहे हैं
दावा ये नया हम लिख रहे हैं

लोग पंसद का फ़िकरा लिख रहे हैं
हम अपने क़ुरान की इकरा लिख रहे हैं

सबके पास अपनी सूक्ति है
अपनी बस लिखने में मुक्ति है

1 टिप्पणी:

masijeevi ने कहा…

"पुरानी डायरी से ज़्यादा रूमानी शायद ही कोई और चीज़ होती है"

खूब कहा।
अच्‍छी कविताएं। कविताएं लिखना फिर भी बंद नहीं करना था :)