07 मई, 2007

नारद पर हिंदू-मुसलमान टंटा यानी 'माइ हेड'

तर्क-वितर्क, सुतर्क-कुतर्क का चक्र-कुचक्र जारी है. हिंदू, हिंदुत्व, मुसलमान,इस्लाम, धर्मांधता, सांप्रदायिकता, धर्मनिरपेक्षता जैसे सारे शब्द ज़रूरत से ज़्यादा ख़र्च हो चुके हैं.

सबकी राय पढ़ी, अपनी राय दी लेकिन बहस है कि चलती जाती है, साथी हैं कि ईंधन झोंके जाते हैं.

समझने वाले समझ गए हैं, जो नहीं समझे हैं वो भी नासमझ नहीं हैं उन्होंने तय कर लिया है कि हम नहीं समझेंगे.

ट्विंकल नाम की पत्रिका में बचपन में पढ़ी हुई कहानी बरबस याद आ रही है, बार-बार याद आ रही है. जो कुछ इस तरह है--

मास्टर साहब पढ़ा रहे थे--'माइ हेड यानी मेरा सिर.'

पढ़ाई करने के बाद शाम को घर पहुँचे टिल्लू से उसके पापा ने पूछा, 'बेटा आज स्कूल में क्या पढ़ा?' टिल्लू ने कहा, 'माइ हेड यानी मास्टर साहब का सिर.'

पापा पहले हँसे, फिर बोले, 'नहीं बेटे, माइ हेड यानी मेरा सिर.' टिल्लू ने कहा, 'माइ हेड यानी आपका सिर.' पापा ने दोहराया, 'बेटे, माइ हेड यानी मेरा सिर.'

टिल्लू अगले दिन स्कूल पहुँचा, मास्टर साहब ने कहा, 'बच्चों, कल का सबक दुहराओ. टिल्लू तुम बताओ, माइ हेड यानी?'

टिल्लू उछलकर खड़ा हुआ, 'मास्टर साहब, माइ हेड मतलब पापा का सिर.' मास्टर साहब ने उसके कान उमेठे और कहा, 'बेवकूफ़, माइ हेड का मतलब पापा का सिर नहीं, मेरा सिर.' टिल्लू ने कहा, 'मेरे पापा ने तो कहा था, माइ हेड मतलब मेरा सिर.'मास्टर साहब बहुत नाराज़ हुए, टिल्लू को एक चपत लगाई और कहा, 'हमेशा के लिए याद कर लो, माइ हेड का मतलब मेरा सिर.'

टिल्लू घर पहुँचा, पापा ने स्कूल की पढ़ाई के बारे में पूछा, टिल्लू ने कहा, 'आपने तो ग़लत बता दिया था, माइ हेड का मतलब आपका सिर थोड़े ही होता है, माइ हेड का मतलब मास्टर साहब का सिर होता है.' पापा बहुत नाराज़ हुए उन्होंने थप्पड़ रसीद करने के बाद टिल्लू को सबक़ एक बार फिर पढ़ाया, 'माइ हेड यानी मेराsss सिर...मेराsss सिर....मेराsss सिर...'

टिल्लू का सिर अब तक माइ हेड का मतलब सुन-सुनकर पक चुका था, दोनों तरफ़ से कान उमेठे जा रहे थे. उसने गहन चिंतन किया और सही निष्कर्ष पर पहुँच गया---माइ हेड यानी स्कूल में मास्टर साहब का सिर, माइ हेड यानी घर में पापा का सिर.

टिल्लू ने जीवन के अनुभव से सीखा है कि माइ हेड का मतलब क्या होता है. न तो उसके पापा के पास इतना अनुभव है, न ही मास्टर साहब के पास जो वे उसे माइ हेड का 'हेड एंड टेल' समझा सकें.

अब आप प्यार से समझाने की कोशिश करें या कान उमेठें, टिल्लू अपने निष्कर्ष पर पहुँच चुका है.

अगर आप ख़ुद को या किसी और को टिल्लू समझ रहे हों तो निम्नलिखित सूचना अवश्य पढ़ लें.

विशेष सूचनाः (इस कथा के सभी पात्र काल्पनिक हैं, किसी भी जागृत या सुप्त चिट्ठाकर की लेखनी या करनी से इसका कोई संबंध नहीं है, अगर कोई संबंध हो तो वह महज एक संयोग है.)

बेहतर यही है कि कोई नया अध्याय शुरू किया जाए, मिसाल के तौर पर 'माइ लेग' यानी नारद की टाँग.

4 टिप्‍पणियां:

Jagadish Bhatia ने कहा…

:D

संजय बेंगाणी ने कहा…

रट लिया. माय लेग यानी नारद की टाँग.

कब खिंचनी है? वह भी बता दें :)

Pratik ने कहा…

सत्य वचन! :)

eSwami ने कहा…

:)